ललितपुर। “आधार” अब विछड़ों से मिलाने का जरिया बन चुका है जिसकी मदद से अब उन परिवारों के मुरझाए चहरों पर मुस्कान विखरने लगी है, जिनके बच्चे उनसे विछड़ गए थे और बर्षों बाद उनसे मिलने में “आधार” मददगार सावित हुआ। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी की पहल मुरझाए चहरों पर मुस्कान के रंग लाती दिखाई दे रही है, जिसके तहत रविवार को एक और बच्चा अपने बिछड़े परिवार से मिल सका।

जिलाधिकारी ने राजकीय बाल गृह दैलवारा में निवासरत बच्चों को आधार के माध्यम से उनके माता पिता से मिलवाने की मुहिम छेड़ी है जिसके तहत बच्चों के आधार कार्ड बनवाए गए। देलबरा बाल गृह में निवासरत 24 बच्चों में से 10 बच्चों के आधार कार्ड का स्टेटस डुप्लीकेट पाया गया। जिसके आधार पर जिलाधिकारी ने लखनऊ मुख्यालय व भारत सरकार के अधिकारियों से बात कर इन बच्चों का आधार कार्ड बनवाया और उनके परिवार का पता लगाया। उक्त 10 में से 7 बच्चों के आधार कार्ड बनकर आ चुके हैं, शेष 3 के आधार प्रक्रियाधीन हैं। इन 7 बच्चों में से कानपुर निवासी सुमित मौर्या नाम के बालक को बीते 24 नवंबर को ही उसके परिवार से मिलाया गया है। उसके बाद जारी रहे प्रयासों से फिर बाल गृह में निवासरत बालक पप्पन उर्फ नीतीश पुत्र मिथिलेश को लगभग 6 वर्ष बाद मुजफ्फरपुर (बिहार) निवासी उसके परिवार से मिलाया गया, तो बच्चे और परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपने पिछड़े बच्चे से मिलने के बाद बच्चे और परिजनों की आंखों से आंसू झलक पड़े। इस अवसर पर बालक नीतीश व अभिभावक एक दूसरे से मिलकर खुशी से झूम उठे और जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, प्रोबेशन अधिकारी नंदलाल सिंह एवं बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों को धन्यवाद दिया। जिलाधिकारी ने बालक नीतीश को उसके अभिभावकों को सौंपते हुए कहा कि अपने बच्चों की अच्छी तरह से देखभाल करें, उनका पूरा ध्यान रखें। उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न होने दें। उन्होंने कहा कि 2 बच्चों को उनके परिवार से मिलाया जा चुका है, जल्द ही शेष बच्चे भी अपने परिवार से मिल सकेंगे।

झाँसी उत्तर प्रदेश

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