Fri. Oct 18th, 2019

राजा की बेटी का पश्चाताप : ऋषि की सालों सेवा की

डबरा –  ग्वालियर जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर पिछोर और गिजोर्रा गांव की पहाड़ियों के बीच स्थित चिमन आश्रम प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तो है ही, इसके साथ जुड़ी मान्यता भी काफी रोचक है।

 

 

 

घटना हजारों साल पुरानी बताई जाती है, दस्तावेजों में तो दर्ज नहीं है लेकिन आश्रम में रहने वाले और आसपास के लोग इसी मान्यता को सच मानते हैं।

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आश्रम में चिमन ऋ षि की समाधि के साथ एक राजा की बेटी की समाधि ऐतिहासिक अतीत को बयान करती नजर आती है। कहानी राजा की बेटी के पश्चाताप से जुड़ी होने के कारण मार्मिक भी हो जाती है।

 

 

 

बताया जाता है कि इलाके का राजा करीब 1200 साल पहले यहां जंगल भ्रमण करने आया था। राजा के साथ उनकी बेटी यानी राजकुमारी भी थी। इलाके की सुंदरता का जायजा लेते हुए वे आश्रम पहुंचे।

 

 

 

यहां चिमन ऋषि समाधि में लीन थे। वे इतने दिनों से समाधिस्थ थे कि उनके शरीर पर मिट्टी की मोटी परत जम गई थी और वह मिट्टी का ढेर दिख रहा था। राजा की बेटी ने कौतूहलवश उसे लकड़ी से छेद दिया।

 

 

ढेर से खून की धार बह निकली। राजा ने मिट्टी हटवाई तो चिमन ऋषि तपस्या में लीन मिले। लकड़ी लगने से उनकी आंखें फूट गई थीं। यह देखकर राजा और बेटी को बहुत पश्चाताप हुआ।

 

 

 

बेटी ऋषि की देखभाल और सेवा करने आश्रम में ही रुक गई। कई सालों की सेवा के बाद ऋषि ने जब समाधि ली तो राजकुमारी ने भी उनके साथ समाधि ले ली। दोनों की समाधि इस मान्यता की पुष्टि करती नजर आती है।

 

 

 

इस आश्रम में तीन पीढ़ियों से रह रहे परिवार के मुखिया स्वामी राधेश्याम शर्मा के मुताबिक यह जगह हजारों साल पहले चिमन ऋषि का तपोवन स्थल था।

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