महोबा: मजदूर दिवस पर आल्हा चौक में  किया प्रदर्शन

महोबा- भीषण गर्मी के बावजूद काम की तलाश में दूर दराज के गांवों से आए मजदूरों ने आज मजदूर दिवस पर आल्हा चौक में प्रदर्शन किया और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए प्रभावी योजनाएं बनाने की मांग की।
बुंदेली समाज ने मजदूरों को तिरंगा कैप व झंडा भेंट किया। इस मौके पर बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने उनको बताया कि पहले मजदूरी के घंटे निर्धारित नहीं थे।मजदूरों से 16-16 घंटे काम लिया जाता था।
अब आठ घंटे ही काम करना होता है लेकिन इसके लिए मजदूरों को बहुत संघर्ष करना पड़ा है। कुर्बानियां देना पड़ी हैं। अमेरिका के शिकागो शहर में मजदूरों ने शोषण के खिलाफ 1886 में विद्रोह कर दिया और एक दिन में आठ घंटे से अधिक काम करने से मना कर दिया।
मजदूर हड़ताल पर चले गये। आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस ने फायरिंग कर दी और आज ही के दिन वहां कई मजदूर मारे गये। उन मजदूरों की याद में ही आज पूरी दुनिया में मजदूर दिवस मनाया जाता है।
समाजसेवी सुधीर दुबे ने बताया कि सन 2012 की जनगणना के मुताबिक भारत में 48.70 करोड़ मजदूर थे जिनमें 94 फीसदी असंगठित क्षेत्र में हैं। बुंदेलखंड के 20 लाख लोग काम की तलाश में महानगरों में मजदूर बन गये हैं।
बगैर बुंदेलखंड राज्य बने उनकी वापसी  नहीं होने वाली। बुंदेलखंड बनने के बाद यहां नये आफिस बनेंगे, नयी बिल्डिंग बनेगी और इससे मजदूरों को सीधा लाभ होगा।
ग्राम सिजहरी के हरीओम निषाद ने कहा कि आल्हा चौक में रोज 300-400 मजदूर आते हैं लेकिन काम आधे भी नहीं पाते। इस मौके पर दुर्गा प्रसाद, मंगल कुशवाहा, खुर्शीद, संतोष अहिरवार, प्रमोद, बाबूलाल रैकवार।