Sun. Apr 21st, 2019

सैनिकों के लिए मराठा शासक ने बनवाया था बुलंद किला

अठारहवीं शताब्दी में मराठा शासनकाल में सैनिकों के लिए ऊंचे पहाड़ पर बनवाया गया आदेगांव का बुलंद किला आज भी क्षेत्र की पहचान है। मराठा शासक रघुजी भोंसले के दीवान खड़क भारतीय गोंसाई ने आदेगांव की दुर्गम पहाड़ी पर इस विशाल किले का निर्माण ईंट, पत्थर व चूना- मिट्टी से करवाया था।

 

 

किले की बाहरी दीवारें आज भी मजबूती के साथ अडिग होकर खड़ी हैं। सदियां बीत गईं लेकिन इन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ है। किले में भगवान काल भैरव का प्राचीन मंदिर है, जो लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।

 

 

पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इस किले को देखने आज भी दूर-दूर से लोग आदेगांव पहुंचते हैं। किले के पिछले हिस्से में बड़ा तालाब भी मौजूद है।किले की ऊंची दीवारें चारों ओर करीब तीन एकड़ में फैली हुई हैं।

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बाहरी दीवार (परकोटा) व बुर्ज को छोड़कर आंतरिक सभी संरचनाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। इसका मुख्य द्वार पूर्व मुखी है जबकि दूसरा दरवाजा पश्चिम की तरफ खुलता है। इतिहास के जानकारों के मुताबिक मराठा शासक रघुजी भोंसले के गुरु नर्मदा भारती का शासन केंद्र यही आदेगांव था।

 

 

हथियारों व सैनिकों के लिए आदेगांव में किले का निर्माण कराया गया था। इस किले का आंतरिक महल अब ध्वस्त हो चुका है। एक दशक पहले पुरातत्व विभाग द्वारा किले के अंदर खुदाई कराई थी।

 

 

इस दौरान यहां कक्ष, बरामदे व अन्य संरचनाएं होने के सबूत मिले थे। किले के इतिहास की ज्यादा जानकारी पुरातत्व विभाग के पास भी मौजूद नहीं है। अभिलेखों के मुताबिक मराठा शासक के गुरु नर्मदा भारती से यह किला उनके शिष्य भैरव भारती, धोकल भारती व दौलत भारती को सौंपा गया।

 

 

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