Sun. May 26th, 2019

1 से 12 तक के वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ डीएम ने ली बैठक

ललितपुर- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निजी स्कूलों की मनमानी फीस वूसली पर अंकुश लगाने के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) आदेश 2018 को प्रभारी ढंग से लागू करने हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलैक्ट्रेट सभागर में जनपद के समस्त कक्षा 1 से 12 के वित्तविहीन मान्यता प्राप्त, अंग्रेजी माध्यम, सीबीएसई, आईसीएसई के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक ललितपुर ने सभी प्रधानाचार्यों को अध्यादेश का अनुपालन कडाई से करने के निर्देश दिये। उन्होंने बताया कि यह अध्यादेश उन सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा जिनका वार्षिक शुल्क 20 हजार रुपये से अधिक है। इसके दायरे में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आइसीएसई व अन्य बोर्ड से मान्यताप्राप्त संबद्ध सकूल सहित वे विद्यालय भी आएंगे जिन्हें अल्पसंख्यक दर्जा हासिल है। यह व्यवसथा प्री-स्कूलों पर लागू नहीं होगी। निजी स्कूल पांच साल से पहले विद्यार्थियों की यूनीफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। यदि निजी स्कूल पांच साल से पहले ऐसा करते हैं तो उन्हें जिलाधिकारी ललितपुर की अध्यक्षता में गठित जनपदीय शुल्क नियामक समिति से मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने बताया कि अध्यादेश में प्रावधान है कि निजी स्कूल अभिभावकों को किसी दुकान विशेष से किताब-कापियां, यूनीफॉर्म, जूते-मोजे व स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे।फीस वृद्धि का यह फॉर्मूला शैक्षिक सत्र 2018-19 से लागू होगा। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित अध्यादेश में यह व्यवस्था है कि स्कूल को अगले शैक्षिक सत्र की शुरुआत से 60 दिन पहले आगामी सत्र में प्रस्तावित फीस को अपनी वेबसाइट एवं नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित कर उसे सार्वजनिक करना होगा। पहली बार यह व्यवस्था लागू होने पर स्कूल को शैक्षिक सत्र की शुरुआत के 30 दिनों के अंदर फीस को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा। छात्रों से वसूली जाने वाली फीस को दो वर्गों में बांटा गया है-संभावित और वैकल्पिक शुल्क संघटक। संभावित शुल्क संघटक के तहत विवरण पुस्तिका व पंजीकरण शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क और संयुक्त वार्षिक ट्यूशन फीस शामिल होगी। स्कूल छात्रों से विवरण पुस्तिका और पंजीकरण शुल्क सिर्फ प्रवेश के समय ले सकेंगे। प्रवेश शुल्क स्कूल में दाखिले के समय सिर्फ एक बार लिया जाएगा। छात्रों से कोई कैपिटेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा। वैकल्पिक शुल्क संघटक के तहत विभिन्न क्रियाकलापों और स्कूल की ओर से दी गईं सुविधाओं के लिए देय शुल्क शामिल होगा जिसे जमा करना बाध्यकारी नहीं होगा। इसमें आवागमन, बोर्डिंग व भोजन की सुविधाओं, शैक्षिक भ्रमण, स्थानीय दौरा तथा अन्य क्रियाकलापों के लिए निर्धारित शुल्क शामिल होगा। जो छात्र यह सुविधा लेना चाहेंगे, उनके अभिभावकों को उसके लिए तय फीस देनी होगी। प्रत्येक फीस के लिए छात्रों को रसीद दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय का एक कोष होगा जिसमें छात्रों को दी गईं सुविधाओं के लिए उनसे प्राप्त धनराशि और स्कूल परिसर में आयोजित व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय शामिल होगी। व्यावसायिक गतिविधियों से प्राप्त होने वाली आय स्कूल के खाते में जमा की जाएगी, प्रबंध समिति ट्रस्ट के खाते में नहीं। फीस को लेकर स्कूल के छात्रों व उनके अभिभावकों तथा अभिभावक संघ की शिकायतों के निस्तारण के लिए जिलाधिकारी ललितपुर की अध्यक्षता में जनपदीय शुल्क विनियामक समिति गठित की जाएगी। अधिसूचित फीस से अधिक लिये गए शुल्क को छात्र को वापस करने के निर्देश के साथ समिति को स्कूल प्रबंधन को आर्थिक दंड देने का अधिकार होगा। समिति के फैसले से असंतुष्ट स्कूल प्रबंध समिति निर्णय प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर राज्य स्ववित्तपोषित विद्यालय प्राधिकरण को अपील कर सकते हैं। समिति प्रावधान के पहली बार उल्लंघन पर 1 लाख रु. और दूसरी बार उल्लंघन पर 5 लाख रु.का जुर्माना लगाएगी। तीसरी बार उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता वापस ली जाएगी। अगर कोई वैकल्पिक सुविधा जैसे वाहन, होस्टल, भ्रमण व कैंटीन की सुविधा लेता है, तभी शुल्क देना होगा. हर तरह के शुल्क की रसीद देना स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि इन नियमों के दायरे में सीबीएससी और आईसीएससी बोर्ड द्वारा संचालित विद्यालयों को भी लिया गया है. साथ ही कोई भी स्कूल बच्चों की ड्रेस में पांच वर्ष तक बदलाव नहीं कर सकेगा और न ही जूते-मोजे किसी दुकान से लेने के लिए बाध्य कर सकेगा। जिलाधिकारी ललितपुर ने समस्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि उक्त अध्यादेश का कडाई से पालन किया जाये। मेरे संज्ञान में यदि किसी विद्यालय द्वारा अध्यादेश का उल्लंघन करने या मनमानी फीस वसूल करने का प्रकरण संज्ञान में आता है तो कठोर से कठोर कार्यवाही की जायेगी। किसी भी विद्यालय को कोई समस्या है तो वह जनपदीय शुल्क नियामक समिति के समक्ष अपनी बात रख सकता है। बैठक में अपर जिलाधिकारी, ललितपुर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ललितपुर सहित अन्य प्रधानाचार्य एवं अधिकारी उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: