सरकार को प्रतिमाह लाखो का चूना लगा रहे डग्गामार वाहन
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सरकार को प्रतिमाह लाखो का चूना लगा रहे डग्गामार वाहन

रिपोर्ट-देवेंद्र राजपूत जिला व्यूरो राठ हमीरपुर

सुमेरपुर हमीरपुर। सड़को में रोडवेज बसों की पर्याप्त संख्या होने के बावजूद डग्गामार वाहनों का संचालन कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है, जो प्रतिमाह राजस्व के नाम पर सरकार को लाखो की चपत लगा रहे हैं, डग्गामार वाहनों में लोगो का जीवन भी असुरक्षित रहता है, अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में लोग जान गंवाते चले आ रहे हैं, सब कुछ पुलिस और एआरटीओ विभाग की आखों के सामने हो रहा है फिर भी डग्गामार वाहनों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है, इससे ज्यादा ताज्जुब की बात क्या हो सकती है, डग्गामार वाहनों से आजिज आकर परिवहन विभाग के कर्मचारियों को डीएम को ज्ञापन देना पड़ रहा है, क्यों कि डग्गामार वाहनों के चालक यात्रियों को रोड वेज बस से उतारकर ले जाने का प्रयास करते हैं यानि खुलेआम सरकार को क्षति पहुंचाने का दुस्साहस करते दिखाई देते हैं फिर भी जिम्मेदार मौन है, डग्गामार वाहन चालकों के हौशले बुलंद हैं, इसका मुख्य कारण लोग पुलिस की मिली भगत मानते हैं क्योंकि बिना पुलिस के सहयोग से सड़क नियमो की अनदेखी कर परिमिट से अधिक सवारियां लेकर चलने का साहस कोई नही जुटा सकता है। लोगो का कहना है कि कस्बा सुमेरपुर से हमीरपुर, मौदहा, जसपुरा बांदा, इगोहटा से छानी, हमीरपुर से कुरारा, पौथिया, सुमेरपुर से सिसोलर, सुरौली, पचखुरा महान, सुमेरपुर से बाकी नदेहरा सहित कई अन्य रूटो पर डग्गामार वाहन चल रहे हैं, खास तौर पर हाई वे में हमीरपुर से सुमेरपुर होकर इगोहटा और मौदहा तक, हमीरपुर से पौथिया छानी तक सैकड़ों की संख्या में तिपहिया वाहन सुबह से शाम तक फर्राटे भरते नजर आते हैं, जिनमे परमिट के विपरीत दर्जनों सवारियां बैठाकर ये वाहन चलते हैं और थाना सुमेरपुर, पुलिस लाइन हमीरपुर तथा एआर्टीओ कार्यालय के सामने से दिन भर गुजरते हैं, लेकिन कोई रोकटोक नही होती है, कोई चेकिंग नही की जाती है, इसका सीधा सा मतलब यही है कि इन्हे रोकने की बजाय उन्हें भरपूर संरक्षण दिया जा रहा है, जिनसे सरकार को माह में लाखो और साल में करोड़ों की क्षति हो रही है, लोग बताते हैं कि मौदहा, इगोहटा, सुमेरपुर, हमीरपुर, कुरारा, पौथिया, छानी, टेढ़ा, जसपुरा बांदा, आदि स्थानों को मिलाकर 150 से अधिक डग्गामार वाहन चल चल रहे हैं, प्रत्येक वाहन की दिन भर आय औसतन 600 रुपए से कम नहीं है, यदि ईंधन अलग कर दिया जाय तो रोजाना एक वाहन 400 रुपए की आय हासिल कर रहा है 150 वाहनों से एक दिन में 60 हजार की आमदनी हो रही है महीने में यही आय 18 लाख पहुंच जाती है और एक वर्ष में आय का आंकड़ा 2 करोड़ 16 लाख तक पहुंच जाता है, यदि डग्गामार वाहनों के बजाय यह आय परिवहन विभाग के पास पहुंचने लगे तो सरकार को न जाने कितना फायदा हो सकता है मगर ऐसा नहीं हो पा रहा है उसकी वजह है कि भ्रष्टाचार में डूबे लोग जिस पत्तल में खा रहे हैं उसी में छेद कर रहे हैं, जो जानबूझ कर सरकार को क्षति पहुंचा रहे हैं चंद पैसों के लालच में यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर गौर नही कर रहे हैं, जोखिम भरी यात्रा करने वाले लोगो के जीवन के प्रति संवेदन शील भी नही है । लोग बताते हैं कि डग्गामार वाहनों की आवश्यकता तब थी जब रोड वेज बसों की कमी थी, दो दो घंटे में बस आया करती थी, यात्रियों को भारी परेशानी होती थी तब डग्गामार वाहन उपयोगी हुआ करते थे किंतु अब तो हर आधा घंटा में बस खड़ी रहती हैं तो अन्य वाहनों की खासतौर पर हाई वे में उनकी जरूरत ही नहीं है, किंतु पर्याप्त बसे होने के बाद भी इनकी संख्या कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है लोगो ने शासन प्रशासन से इस संबंध मे गौर फरमाने की मांग की है।