समथर में बुंदेलखंड की मौनियां दांडिया परम्परा निभाई गई
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समथर में बुंदेलखंड की मौनियां दांडिया परम्परा निभाई गई

रिपोर्टर संजीव व्यास समथर।

झांसी।  कस्बा समथर में मोंगिया समाज के लोगों ने कई बरसों से चली आ रही बुन्देलखण्ड की परम्परा के अन्तर्गत दीपावली पर्व के दूसरे दिन मोंगिया समाज के लोगों ने नगर में भ्रमण कर मौनियां दांडिया कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें श्री कृष्ण और गोपीकाओं के स्वरूप बनाए गये। मोंगिया समाज के लोगों ने जगह जगह मौनियां दांडिया नृत्य प्रस्तुत किया। समाज के लोगों का कहना है कि पहले हमारे पूर्वज यह परम्परा निभाते थे।अब हम निभा रहे हैं।यह दीपावली के दूसरे दिन मौन परमा को पुरुषों द्वारा किया जाता है। इसमें मोर के पंखों को लगाकर बड़े ही मन भावुक अंदाज में किया जाता है। लोगों का कहना है कि एक बार श्री कृष्ण भगवान यमुना नदी के किनारे बैठे हुए थे। तभी उनकी सारी गायें कहीं चली गई थीं।अपनी गायों को न पाकर वह वहुत दुखी हुए और श्री कृष्ण भगवान मौन हो गये। भगवान को दुःखी देखकर सभी गवाल वाल परेशान हो गये। और जब तक ग्वाल सखाओं ने सभी गायों को तलाश कर भगवान के समक्ष नहीं कर दिया तब तक चैन से नहीं बैठे। जब भगवान ने सभी गायों को अपने समक्ष देख लिया तब उन्होंने अपना मौन खोला ।इसी के अनुरुप यह प्राचीन परंपरा चली आ रही है। यह भी कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण जब प्रसन्न मुग्धता में होते थे तो राधा व गोपियों के साथ नृत्य करते थे।उसी के अनुरुप सेवा भाव में लीन होकर हम सब मौनियां नृत्य करते हैं। और मौन व्रत कर हम निभाते हैं। और ग्यारह बर्ष पूर्ण होने के बाद मथुरा में जाकर इसका समापन करते हैं।

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