मोंठ ( झाँसी ):कुंती ने भगवान से दु:ख क्यों मांगा- कथा व्यास पंडित श्री शंकर शरण पाठक जी मद नगर में पानी की टंकी के बगल में तथा टीकाराम यादव स्मृति महाविद्यालय के पास चल रही श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस भागवत कथा व्यास पंडित श्री शंकर शरण पाठक जी महाराज के द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का भक्तों को रस पान कराया गया। शास्त्री जी ने कथा के दूसरे दिन गोकर्ण धुंधकारी की कथा का बड़े ही मार्मिक ढंग से वर्णन किया । नारद जी के पूर्व जन्म की कथा सुनते हुए बताया की नारद जी पूर्व जन्म में दासी पुत्र थे। संत महात्माओं की जूठन प्रसाद खाकर के उनके सारे पाप नष्ट हो गए। संतो के सत्संग के माध्यम से ब्रह्मा जी के पुत्र बने शास्त्री जी ने आगे के क्रम में महाभारत की कथा सुनाई ।एक भाई ने जब एक भाई का अधिकार नहीं दिया तो महाभारत जैसा युद्ध हो गया। इसलिए भाई को भाई के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए ।भगवान जब हस्तिनापुर से द्वारका जाने लगे पांडवों को राज्य सौंपा तो बुआ कुंती ने भगवान कन्हैया से चलते समय दुख मांगे।

इसलिए दुख में यह जीव भगवान को याद करता है ।सुख में भूल जाता है ऐसे सुख से दुख अच्छा है कि भगवान की याद आती रहे ।भगवान हमारे पास में बने रहें जब तक पांडवों की जीवन में दु:ख रहा तब तक भगवान उनके साथ में रहे जब सुख आ गया तो भगवान छोड़कर के द्वारिका चले गए थे। श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिन समापन के अंत में परीक्षत श्रीमती नीता बादल और संजय बादल ने श्रीमद् भागवत पुराण की आरती की और उसके बाद श्रोताओं को प्रसाद वितरण किया गया ।इस मौके पर केशव चंद्र बादल, आत्माराम,महेशचंद्र ,रमेशचंद्र , कमलेश शरण महन्त ,अखिलेंद्र तिवारी , राघवेन्द्र मिश्रा ,राकेश कुमार मुदगिल ,पंकज चचोंदिया, गुड्डा पाठक ,संतोष कुमार नगाइच, कुलदीप लिटौरिया, सुनील मुदगिल ,ललत पाठक, राममोहन श्रीवास्तव ,एंड संतोष वर्मा ,एंड जयप्रकाश दांगी ,सुरेन्द्र यादव, सोमनाथ यादव ,जगदंबिका राजपूत ,पार्षद नीलेश कुमार , राजेश कुरैशी,अनिल सोनी, बबलू खरे, आकाश सिंह,पवन मिश्रा, बबलू कुशवाहा ,जुगल किशोर पाण्डेय ,पार्षद दयाल गिरी ,भानू पाण्डेय, सियाशरण महाराज,नीलय, सतीशचंद्र ,राजकुमार, मनोज ,अजय, विकास ,विवेक, अमन ,अभय, पुष्कर, सक्षम, आशुतोष सहित सैकड़ो लोग मौजूद रहे।

झाँसी उत्तर प्रदेश

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