कटेरा मेला जलविहार महोत्सव की चौथी रात बुंदेली लोकगीतों के नाम रही
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कटेरा मेला जलविहार महोत्सव की चौथी रात बुंदेली लोकगीतों के नाम रही

रिपोर्टर -महादेव भास्कर कटेरा

कटेरा (झांसी) मेला जलविहार महोत्सव में चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में चौथी रात अखिल भारतीय बुंदेली लोकगीत का रंगारंग कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
कलाकारों द्वारा गाये लोकगीत की धूम पर उपस्थित जनसैलाब झूम उठा।
वीरांगना झलकारीबाई स्टेडियम में कार्यक्रम के मंच पर मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक रश्मि आर्य पप्पू सेठ व विशिष्ट अतिथि दीपमाला कुशवाहा (प्रदेश अध्यक्ष महिला अपना दल), कालका प्रसाद पटेल (बुंदेलखंड प्रभारी अपना दल), चेयरमैन धनीराम डबरया, ओमप्रकाश लिपिक, पूर्व चेयरमैन कुन्नूलाल अहिरवार, हुकुमचंद्र दिनकर, शीलू प्रधान रतोसा, राजू पायक, कौशलेंद्र सिंह, संजू सोनी, भगवत साहू, प्रदीप सिंह गौर मगरवारा ने दीप प्रज्वलित व फीता काटकर लोकगीत कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मंच संचालन पूर्व चेयरमैन महेश कटैरिया व पूर्व पार्षद सुखनंदन वर्मा ने किया। चेयरमैन धनीराम डबरया, ओमप्रकाश लिपिक, कार्यक्रम संयोजक पार्षद पवन कुमार व गुड्डी देवी अहिरवार, डॉ लाखन सिंह यादव, मोहनलाल आर्य, रूपेन्द्र राय, नीलू गुप्ता, नरेन्द्र गोळ्या, नगर पंचायत के पार्षद व उनके प्रतिनिधियों ने अतिथियों का माल्यापर्ण स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक पार्षद पवन कुमार व गुड्डी देवी ने अतिथियों का बैच लगाकर स्वागत किया। इस दौरान मेला महोत्सव में जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि रश्मि आर्य पप्पू सेठ ने कहा बुन्देली लोकगीत बुन्देखण्ड का साहित्य और गौरव है। उन्होंने कहा कि आज लोकगीत गायक इस संस्कृति को अपने गायन से आगे बड़ा रहे है।
विशिष्ट अतिथि दीपमाला कुशवाहा ने कहा कि मेला जलविहार महोत्सव को आगे बढ़ाने में जितना योगदान आयोजकों का है उससे कहीं ज्यादा आप सभी दर्शकों का है। दर्शकों की बेशुमार उपस्थित देख निश्चित है कि आप सभी महोत्सव के कार्यक्रमों से संतुष्ट है और जनमानस प्रसनन्ता में है।
कार्यक्रम का शुभारंभ बबलू रंगीला ने मातारानी का आवाह्न करते हुए वन्दना में गाया करते है अभिनंदन हो मइया। शत बार तेरा बंदन।। गीत से शुरुआत की और अतिथियों के सम्मान में स्वागत गीत गया। इसके बाद नेहा दिसोरिया ने काय फोड़ी मटकिया माखन की।
मोरी भिड़ गयी चुनरिया लाखन की।। साथ ही कलाकार सतीश यादव व पुष्पेन्द्र यादव ने एक से बढ़कर एक बुन्देली लोकगीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।

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