June 4, 2020

पुलिस टीम पहुंची तो पिता बोले- क्या शहीद हो गया मेरा बबलू

अम्बिकापुर। आज तड़के जैसे ही उपनिरीक्षक के शहीद होने की खबर देने पुलिस टीम के साथ गांव का युवक उनके घर पहुंचा तो वृद्ध पिता के मुंह से क्या शहीद हो गया मेरा बबलू बेटा? यह गौरव से भरा शब्द निकला। 75 बरस की आयु में बेटे की शहादत को लेकर निकले वाक्य से सभी स्तब्ध रह गए। राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा में नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद हुए एसआई श्याम किशोर शर्मा का पार्थिव देह दोपहर एक बजे तक अंबिकापुर से लगे उनके गृह ग्राम खाला पहुंचेगा। यहां प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार करने की तैयारी शुरू हो गई है। पुलिस व प्रशासन के अधिकारी खाला गांव पहुंच चुके हैं। सभी को शहीद श्याम किशोर शर्मा के पार्थिव देह गृहग्राम पहुंचने का इंतजार है।

अंबिकापुर से लगे छोटे से गांव खाला में पले बढ़े श्याम किशोर शर्मा 38 साल की आयु में ही शहीद हो गए हैं। उनकी शहादत पर गांव वालों को नाज भी है लेकिन उत्साह से लबरेज दृढ़ निश्चयी युवा के चले जाने का दुख भी है। खाला गांव के लोग इस घटना से स्तब्ध हैं।

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शहीद उप निरीक्षक श्याम किशोर शर्मा के पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित करने पूरा गांव तैयारी में जुटा है, लेकिन लाक डाउन की परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन कराने की भी व्यवस्था की जा रही है। पांच भाई-बहनों में उपनिरीक्षक श्याम किशोर शर्मा सबसे छोटे थे। उनके दो भाई गांव में ही खेती करते हैं। एक भाई बृज किशोर शर्मा अंबिकापुर जिला व सत्र न्यायालय में अधिवक्ता हैं। परिवार में वृद्ध पिता बृजमोहन शर्मा 75 वर्ष के हैं।

देर रात राजनांदगांव से जब यह खबर सरगुजा पहुंची तो तत्काल परिजनों तक इस दुखद खबर को देने पुलिस अधिकारी-कर्मचारी भी साहस नहीं जुटा पा रहे थे। खाला गांव के एक उत्साही युवा अनवर खान के साथ दरिमा थाना प्रभारी भारद्वाज सिंह और पुलिसकर्मी शहीद उपनिरीक्षक श्याम किशोर शर्मा के घर पहुंचे। सबसे पहले मुलाकात पिता बृजमोहन शर्मा से हुई।

अनवर के मुताबिक शहीद उपनिरीक्षक श्याम किशोर शर्मा का घरेलू नाम बबलू था। सुबह जब उन्होंने उनके पिता से सिर्फ इतना कहा कि चाचा जी बबलू के विषय में खबर आ रही है, इतना सुनते ही वृद्ध पिता ने जवाब दिया कि क्या वह शहीद हो गया? बेटे की शहादत को लेकर पिता के मुंह से यकायक निकले इस शब्द से पुलिसकर्मी भी स्तब्ध रह गए। थोड़ी देर के लिए किसी के मुंह से आवाज नहीं आई। शहीद उपनिरीक्षक के पिता भी स्तब्ध हो गए और कुछ देर बाद बेटे के चले जाने का गम उनकी आंखों से अश्रुधारा बनकर छलक पड़ा। वे रोने लगे।