June 4, 2020

बिलासपुर में लॉकडाउन के दौरान निकले 107 सांपों को अजिता ने दी नई जिंदगी

धीरेंद्र सिन्हा, बिलासपुर (नईदुनिया)। लॉकडाउन के 44 दिन के भीतर शहर में बड़ी संख्या में विषधर निकले। उनके विचरण से लोगों में डर भी दिखा। घर में उठना-बैठना तो दूर, चैन से सोना भी दूभर हो चुका था। इस बीच एक ऐसी भी सख्स रही जिसने न केवल लोगों को राहत पहुंचाई, बल्कि जहरीले सांपों को बड़ी आसानी से पकड़कर व जंगल में छोड़कर उन्हें नई जिंदगी दी। शहर की बेटी अजिता पांडेय नर्सिंग की छात्रा होने के साथ ही वन्य प्राणियों के साथ भी लगाव रखती है। सांप पकड़ने में भी पूरी तरह से सिद्धहस्त है। सांपों को पकड़कर वह उन्हें जीवनदान देती है। डिब्बे में बंद कर शहर से दूर अचानकमार व कानन पेंडारी जू में छोड़ आती है। अजिता बताती है कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने वाट्सएप व सोशल मीडिया के जरिए अपना नाम व मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर लोगों से अपील की थी कि घर या आसपास सांप निकलने पर आप उसे मारें नहीं, बल्कि तत्काल सूचना दें। इसका असर भी हुआ। जब-जब लोगों के फोन आते रहे झट अपनी स्कूटी उठाकर लोगों के बताए पते पर पहुंच जाती और सांप को पकड़कर उसे नया जीवनदान देती। सरकंडा थाने के पीछे आशा धाम मार्ग निवासी अजिता के पिता भेचेंद्र पांडेय एक आर्टिस्ट हैं। परिवार में सांप को पकड़ने एक भी सदस्य नहीं है। अजिता उनके खानदान में पहली बेटी है जिसने इस खतरनाक विषधरों को नई जिंदगी देने का बीड़ा उठाया है। प्रतीक्षा स्नेक सेल वाइल्ड लाइफ से जुड़कर अब तक सैकड़ों सांप की जिंदगी बचा चुकी है। वह कहती है कि सांप किसानों का मित्र है। पर्यावरण चक्र का सिस्टम है। इसे मारना नहीं चाहिए। बता दें कि इंस्टाग्राम और टिक टॉक पर बड़ी संख्या में अजिता के फालोअवर भी हैं।सांप ही नहीं पालतू जानवरों से भी अजिता को लगाव है। लॉकडाउन में एक ओर जहां इंसान के साथ मवेशी और कुत्ते भी परेशान हैं। ऐसे में प्रतिदिन मवेशियों और कुत्तों को भोजन भी कराती रही। पक्षियों के लिए दाना व पानी की भी व्यवस्था की है। रात 11 बजे तक शहर की सड़कों पर घूम-घूमकर उनका ख्याल रखती है। वह कहती है कि मुझे यह तड़पते हुए बच्चे लगते हैं। इसलिए सेवा में जुट जाती हूं।