June 4, 2020

श्रीमद्भागवत के महात्म्य की कथा का वर्णन किया गया।

मद्भागुरसराँय – तालाब माता मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रीगतव के महात्म्य की कथा का वर्णन किया गया। भागवत कथा व्यास आचार्य पं कृष्णा शास्त्री ने कहा कि मनुष्य जन्म दुर्लभ है
और यह सत्संग भी पूर्व जन्म के पुण्य के प्रभाव से मिलता है। उन्होंने भागवत के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत वेद रूपी वृक्ष का पका हुआ फल है। उन्होंने कहा कि जिसके मां बाप दुखी होते हैं उसके समस्त तीर्थ
पूजन और भजन बेकार हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मां-बाप की सेवा में ही समस्त गुणों का फल है। साथ ही उन्होंने कहा कि गुरु के चरणों में बैठने से संस्कार आते हैं तभी व्यक्ति कुशल वक्ता बन पाता है।
महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में व्यक्ति एक बार मरता है लेकिन प्रतिष्ठित व्यक्ति का यदि अपमान हो जाए तो वह बार-बार मरता है उसका सबसे बड़ा मरण उसका अपमान है  ।उन्होंने कहा  की दुष्ट व्यक्ति अपना
स्वभाव नहीं बदल सकता है इसलिए उससे हमेशा सावधान रहना चाहिए।संगीतमय कथा में ऑर्गन एवं सह गायन प्रमोद गोस्वामी नाल पर देवेन्द्र घोष पैड पर नीलू ने संगत की। कथा की आरती  प्रेम सोनी ने की
इस मौके पर  पं बृज किशोर व्यास  राधा रमन शर्मा बल्लू महाराज  गणेश पस्तोर  महेंद्र जोशी  गंगा प्रसाद श्रृंगी ऋषि भोले  पटसारिया  लक्ष्मीनारायण घोष  सुनील सेन   सोहन लल्ला शीतल पस्तोर  शिवराम विधवा मिथिलेश सेन  शैलेंद्र मिश्रा  आदि उपस्थित रहे ।